Success Failure Story Hindi असफलता सफलता और सोच

दोस्तों आज हम आपके लिए लेकर आये हैं Success Failure Story Hindi असफलता सफलता और सोच पर एक Short Story जो की ना केवल Motivational है बल्कि आपके भविष्य को नया आयाम भी देगी| आशा है आप पसंद करेंगे
Success Failure Story Hindi असफलता सफलता और सोच

Success Failure Story Hindi
असफलता सफलता और सोच

इस बात से आप भी इंकार नहीं करेंगे की हम सभी के जीवन में एक समय या पड़ाव ऐसा आता है जब सभी चीज़ें आपको अपने विरोध या विपक्ष में लगने लगती हैं और उस समय आप अपने आपको कमजोर और लाचार समझने लगते हैं और ऐसा लगने लगता है जैसे कुछ सही नहीं हो रहा ऐसा मेरे साथ ही क्यों हो रहा है?

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Heart Touching Motivational Story Hindi आत्महत्या समाधान नहीं

दोस्तों आज हम आपके साथ एक Heart Touching Motivational Story Hindi में आपके साथ शेयर कर रहे हैं जिसका उद्देश्य है कि आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है|

Heart Touching Motivational Story Hindi आत्महत्या समाधान नहीं
Heart Touching Motivational Story Hindi
आत्महत्या समाधान नहीं

महर्षि रमण के आश्रम के पास एक ग्राम में एक अध्यापक रहता था| प्रतिदिन के पारिवारिक कलह से त्रस्त होकर उसने आत्महत्या की सोची, ताकि वह रोज-रोज की अशांति से मुक्त हो सके, किंतु आत्महत्या का निर्णय लेना इतना आसान नहीं था| मनुष्य को अपने परिवार के भविष्य की ओर भी ध्यान देना होता है| इस उहापोह में पड़ा वह व्यक्ति महर्षि रमण के आश्रम में पहुंचा और उसने उन्हें प्रणाम करके सारी बात बताकर आत्महत्या के बारे में उनकी राय जाननी चाही|

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Short Story Bad Habits गलत आदत Hindi

दोस्तों Short Story Bad Habits गलत आदत Hindi के माध्यम से आज हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं वो सन्देश जो आपके लिए वरदान साबित होगा|

Short Story Bad Habits गलत आदत Hindi

Short Story Bad Habits गलत आदत Hindi

स्वामी विवेकानंद परम ज्ञानी थे| दूर-दूर से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आया करते थे| एक बार उनके पास एक युवक आया और उनसे बोला- मैं अपने व्यसन छोड़ना चाहता हूं| स्वामीजी ने पूछा तुम्हें कौन-कौन से व्यसन हैं? युवक बोला- मैं शराब पीता हूं, जुआ खेलता हूं, गांजे-चरस का शौकीन हूं और इनके अतिरिक्त कई व्यसन तो ऐसे हैं जिन्हें आपके सक्षम कहते हुए भी शर्म महसूस होती है| स्वामीजी ने कहा- जिन व्यसनों को कहते हुए भी शर्म महसूस होती है उन्हें करते हुए शर्म नहीं आती? आज से ही यह सब छोड़ दो| युवक बोला- एकदम कैसे छोड़ दूं? मैं इन सभी का इतना आदी हो गया हूं कि ये सब धीरे-धीरे ही छूटेगा| युवक की यह बात सुनकर स्वामीजी ने उसे अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के जीवन की एक घटना सुनाई-

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Hindi Story Moral Values गलतियों को सुधारें और प्रगति करें

दोस्तों आज के हमारे इस Article “Hindi Story Moral Values गलतियों को सुधारें और प्रगति करें” में आप जानेंगे के आगे बढ़ने के लिए हमें क्यूँ अपनी गलतियों को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए|

Hindi Story Moral Values गलतियों को सुधारें और प्रगति करें
Hindi Story Moral Values गलतियों को सुधारें और प्रगति करें

एक शिल्पकार था| वह जब भी कोई मूर्ति बनाता तो स्वयं ही उसकी कमियां ढूंढता और फिर वैसी ही दूसरी मूर्ति बनाता जिसमें वे कमियां नहीं होती| वह पहली मूर्ति को नष्ट कर देता और दूसरी मूर्ति को ही बाजार में बेचता था| एक बार उसने अत्यंत सुंदर मूर्ति बनाई| जब उसने देखा कि इस मूर्ति में कोई कमी नहीं है, तो वह आश्चर्यचकित हुआ| उसने खूब सूक्षमता से उस मूर्ति से उस मूर्ति का अवलोकन किया और पाया कि इस मूर्ति में कोई कमी नहीं है तो वह रोने लगा| उसके रोने की आवाज उसके पड़ोस में रहने वाले दूसरे शिल्पकार ने सुनी| वह उसके पास आया और उसके रोने का कारण पूछा| शिल्पकार ने कहा कि मुझे इस मूर्ति में कोई कमी नहीं दिख रही है| पड़ोसी ने पूछा-जब कोई कमी नहीं है तो फिर तुम रो क्यों रहे हो? शिल्पकार ने कहा-जब तक मुझे अपनी कमियां नहीं दिखती, तब तक मैं अपनी कला को सुधार नहीं सकता| आज मुझे कोई त्रुटि दिख नहीं रही है, इसलिए मुझे रोना आ रहा है| यदि तुम मेरी इस मूर्ति में कोई कमी निकाल दो तो मैं तुम्हारा आभारी रहूंगा| पड़ोसी ने ध्यान से मूर्ति को देखा और मूर्ति की नाक, कमर व पैरों की उंगलियों में कुछ त्रुटियां निकाली| अपनी मूर्ति की त्रुटियां जानकर शिल्पकार बहुत प्रसन्न हुआ और समझ गया कि कई बार हम स्वयं अपनी त्रुटियां नहीं जान पाते हैं, जबकि दूसरे व्यक्ति उसे साथ-साथ दूसरों से भी अपनी त्रुटियां जानकर सुधारी जाएं तो व्यक्ति बहुत प्रगति कर सकता है|

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Heart Touching Hindi Story तन से बढ़कर मन

दोस्तों आज मैं आपके साथ शेयर करूँगा एक ऐसी Hindi Story जो सही मायने में आपके जीवन को नया आयाम देगी, Heart Touching Hindi Story तन से बढ़कर मन ये आपने कई बार बड़े बुजुर्गो को कहते सुना होगा आईये जानते हैं क्यों…

Heart Touching Hindi Story तन से बढ़कर मन

Heart Touching Hindi Story तन से बढ़कर मन

महाकाव्य मेधदूत के रचयिता कालिदास मूर्ख नाम से प्रसिद्ध हैं, जिनका विवाह सुंदर व महान विद्योमता से हुआ था| उन महाकवि से राजा विक्रमादित्य ने एक दिन अपने दरबार में पूछा, क्या कारण है, आपका शरीर मन और बुद्धि के अनुरूप नहीं है? इसके उतर में कालिदास ने अगले दिन दरबार में सेवक से दो घड़ों में पीने का पानी लाने को कहा| वह जल से भरा एक स्वर्ण निर्मित घड़ा और दूसरा मिट्टी का घड़ा ले आया| अब महाकवि ने राजा से विनयपूर्वक पूछा, महाराज| आप कौनसे घड़े का जल पीना पसंद करेंगे? विक्रमादित्य ने कहा, कवि महोदय, यह भी कोई पूछने की बात है? इस जयेष्ट मास की तपन में सबको मिट्टी के घड़े का ही जल भाता है| कालिदास मुस्कराकर बोले, तब तो महाराज, आपने अपने प्रश्न का उतर स्वयं ही दे दिया| राजा समझ गए कि जिस प्रकार जल की शीतलता बर्तन की सुंदरता पर निर्भर नहीं करती, उसी प्रकार मन-बुद्धि का सौंदर्य तन की सुंदरता से नहीं आंका जाता|

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